शनिवार, 29 जनवरी 2022

The coming time will be a challenge for man

 New Delhi: Pawan Aggarwal

Amb.Dr.B.M.Uwais 

My Mission  Future Generations Assuming Welfare Many Functions In Conduction Nature. We Have Been Doing Regarding Of The Type Of Reflection. Considering The Welfare Of The People. We Are Introducing Awareness Programs. As a Request We All Ignored Nature. We Have Many Evil Consequences Today. We Are Suffering It Globally. We Want To Live Beautifully In Order For Us To Travel Luxury As a Result Ignoring Nature. We Are Experiencing So Much Suffering Today.. 

We Are All Compelled To Do Our Functions Together With The Movement. So Respecting Nature We Set Up Life Functions. This System Has Been Started Raising Awareness Not Only In One Country But All Over World. I Have Dedicated Our Life To Making a Differences. Therefore Our Children Are Going Be In This World Tomorrow And We Need To Train Them To Travel With Nature. The Times To Come Will Be a Challenge To Human Society. We Must All Lead Our Children The Way To Overcome Obstacles. That Must Be The Case The Dangers That Come To Us. 

When We Live Nature Are Minimal Construct Building And Set Up Terraces In The Present Period Man Destroy Himself Using Artificial Methods is On The Way. They Made Artificial Air And Expanded Them And Got Used To Living In Luxury. Because Of This We Today Suffer From Various Diseases And Sudden Death. Cold. Lined Rooms Are Like Halls And Vehicles Exercises Used Synthetic Materials And Got Used To Them In Contrast Humans Living In Forests And Mountains Die Of Disease. 

They Overcome Diseases Like High Blood Pressure, Heart Attack, And Neurosis. They Chase Nature  To Live In Prosperity And Made It Prosperous. They Live a Normal Life By Consuming Natural Foods. No One Who Love Nature Has Failed. This System Was Started Show Now We Should Live Together..

✍Amb.Dr.B.M.Uwais

 

शनिवार, 22 जनवरी 2022

भारत की आजादी में नेता जी सुभाष चंद्र बोस का योगदान : डॉ मुकेश अग्रवाल

125वीं जन्म जयंती एवं पराक्रम दिवस पर विशेष 

 घरौंडाः पवन कुमार

भारत की आजादी के आंदोलन में ऐसे अनेक क्रांतिकारी हुए, जिन्होंने मुल्क को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया । ऐसे ही एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जिन्होंने अपना सब कुछ देश की आजादी के लिए दांव पर लगा दिया। आईए उनकी 125वीं जन्म जयंती पर जानते है उनके व्यक्तित्व एवं योगदान के बारे में। 

असीम साहस, अनूठी संकल्प शक्ति

नेता जी सुभाष सुभाष चंद्र बोस का मानना था कि आजादी हमारा अधिकार है। उन्होंने कहा था कि आजादी मांगी नहीं जाती, आजादी छीनी जाती है। 1921 में नेता जी सुभाष सुभाष चंद्र बोस प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। नेता जी के उग्र विचारों के कारण देश कई लाखों युवाओं का उनको समर्थन मिला। उनके अन्दर असीम सासह और अनूठी संकल्प  शक्ति का अनंत प्रवाह विद्यमान था। उनके जीवन पर स्वामी विवेकानंद का बहुत प्रभाव था।

 गाँधीजी से असहमति

20 जुलाई 1921 को उनकी मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से भी हुई, गांधीजी के कहने पर नेताजी ने असहयोग आंदोलन में बड़े गर्मजोशी से भाग लिया। फिर उन्होंने देशबंधु चितरंजन दास के साथ मिलकर बंगाल  आन्दोलन का नेतृत्व किया। नेताजी हमेशा मानते थे कि मात्र अहिंसा के दम पर कभी देश को आजाद नही करवाया जा सकता, इसीलिए गांधीजी से उनकी असहमति हमेशा बनी रहती थी। भगत सिंह की फांसी की सजा ना रुकवा पाने के कारण सुभाष गाँधीजी से नाराज थे। 1938 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनना गाँधीजी को पसंद नही आया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 

अंग्रेजो के लिए बड़ा खतरा

महान देशभक्त और कुशल नेता सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति थे। ब्रिटिश सरकार सुभाष बोस को हथकड़ियां पहनाने के बहाने खोजती थी, वह किसी भी कीमत पर उन्हें आजाद नहीं छोड़ना चाहती थी। उनकी गतिविधियों ने ना सिर्फ अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए वरन देश छोड़ कर जाने पर मजबूर कर दिया। 

आजाद हिंद फौज की स्थापना

नेता जी का मानना था कि भारत से अंग्रेजी हुक़ूमत खत्म करने के लिए सशस्त्र बिद्रोह ही एकमात्र रास्ता हो सकता है अतः उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपनी एक अलग फौज भी ख़डी की थी जिसे उन्होंने नाम दिया था 'आजाद हिन्द फौज'। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने सशस्त्र क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को ‘आजाद हिन्द सरकार’ की स्थापना की, इस संगठन के प्रतीक चिह्न एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। यह फ़ौज उन्होंने जापान की सहायता से खड़ी की थी। अपनी यूरोप यात्रा के दौरान वो हिटलर से भी मिले थे, जर्मनी में हिटलर के नाजीवाद और इटली में मुसोलोनी के फासीवाद के विरुद्ध अंग्रजी ताकत खड़ी थी और नेता जी मानते थे कि दुश्मन का दुश्मन एक मित्र होता है,इसलिए नेताजी हिटलर की मदद से भरी को आजाद करवाना चाहते थे। 

क्रांतिकारी नारो का आगाज़

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा”, “दिल्ली चलो” और “जय हिन्द“ जैसे नारों से सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नई जान फूंकी थी। उनके जोशीले नारे ने सारे भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया। ये कुछ ऐसे नारे हैं जो आज भी राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर हमें याद दिलाता रहता है कि हम एक हैं। देश में क्रांतिकारी नारों के आगाज़ वाले तथा ललकार के साथ अंग्रेजी हुकूमत का डटकर सामना करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी वीरों में बड़े सम्मान व श्रद्धा के साथ लिया जाता है। अत्यंत निडरता से सशस्त्र उपायों द्वारा सुभाष चंद्र बोस ने जिस प्रकार अंग्रेजों का मुकाबला किया उसके जैसा अन्य कोई उदाहरण नहीं मिलता है, तभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पूरा जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

सोमवार, 17 जनवरी 2022

राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अधिवक्ता आशीष जिन्दल जी के द्वारा विश्व हिन्दू वाहिनी का विस्तार।


पूर्वी उत्तर प्रदेश दौरे पर विश्व हिन्दू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय आशीष जिंदल जी के द्वारा संगठन का विस्तार....

आज दिनांक 16/01/2022 को विश्व हिन्दू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अधिवक्ता आशीष जिन्दल जी पुर्वी उत्तर प्रदेश के दौरे पर पदाधिकारियों के साथ विश्व हिन्दू वाहिनी संगठन का विस्तार किया गया।
 जिसमें गत वर्षों से कार्य कर रहे मोहित वाजपेयी निवासी कुशीनगर सीतापुर को राष्ट्रीय संयोजक आई० टी० प्रकोष्ठ उनकी उत्तम कार्यशैली को देखते हुए पदोन्नति कर नियुक्त किया गया।
साथ ही मोहित वाजपेयी जी द्वारा माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष जिन्दल जी एडवोकेट जी को एवं प्रदेश पदाधिकारियों को श्री राम नाम का पटका पहनाकर स्वागत सत्कार किया गया।
इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष मुख्य शाखा अरिहंत जैन जी, प्रदेश संगठन मंत्री मुख्य शाखा प्रबल प्रकाश वर्मा जी और प्रदेश प्रभारी आईटी प्रकोष्ठ कुशांक गर्ग जी उपस्थित, संदीप अवस्थी जिलाध्यक्ष सीतापुर, हरिओम रस्तोगी, शिवम नाग सहित बहुत से कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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शनिवार, 15 जनवरी 2022

राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के लखनऊ दौरे पर संगठन विस्तार : @vhvofficial

लखनऊ दौरे पर विश्व हिन्दू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय आशीष जिंदल जी के द्वारा महिला मोर्चा का विस्तार....


आज दिनांक 15/01/2022 को विश्व हिन्दू वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय आशीष जिंदल जी द्वारा लखनऊ दौरे पर प्रदेश पदाधिकारियों के साथ विश्व हिन्दू वाहिनी महिला मोर्चा का विस्तार किया गया।

जिसमें गत वर्षों से कार्य कर रहीं प्रदेश संगठन मंत्री महिला मोर्चा श्रीमती ज्योति सिंह जी की उत्तम कार्यशैली को देखते हुए पदोन्नति कर महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्षा नियुक्त किया गया।
साथ ही श्रीमती ज्योति सिंह जी द्वारा माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष जिंदल जी एवं प्रदेश पदाधिकारियों को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी का स्मृति चिन्ह भेंट कर एवं जय श्री राम का पटका पहनाकर स्वागत सत्कार किया गया। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष मुख्य शाखा अरिहंत जैन जी, प्रदेश संगठन मंत्री मुख्य शाखा प्रबल प्रकाश वर्मा जी और प्रदेश प्रभारी आईटी प्रकोष्ठ कुशांक गर्ग जी मौजूद रहे।




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