रविवार, 20 जून 2021

योगः प्रकृति का अनमोल उपहार


~ पवन अग्रवाल, घरौंडा
शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता
योग की उत्पत्ति सर्वप्रथम प्राचीन समय में योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग शब्द के दो अर्थ हैं– जोड़ना और अनुशासन। योग का अभ्यास हमारे शरीर और मस्तिष्क को अनुशासन सिखाता है। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जो शरीर और मस्तिष्क के संतुलन के साथ ही प्रकृति के करीब आने के लिए ध्यान के माध्यम से किया जाता है। यह प्राचीन समय में हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों द्वारा किया जाता था। यह शरीर और मन को नियंत्रित करके जीवन को बेहतर बनाता है। 
योग स्वस्थ जीवन जीने का विज्ञान है। यह एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगों के कार्यों करने के ढ़ंग को नियमित करके विभिन्न बीमारियों को धीरे-धीरे ठीक करता है। योग वह क्रिया है जो शरीर के अंगों की गतिविधियों और सांसों को नियंत्रित करता है। यह शरीर व मन दोनों को प्रकृति से जोड़कर आन्तरिक और बाहरी ताकत को बढ़ावा देता है। 
यह केवल शारीरिक क्रिया नहीं बल्कि यह मनुष्य को मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक विचारों पर नियंत्रण करने के योग्य बनाता है। इसका अभ्यास लोगों के द्वारा किसी भी आयु में किया जा सकता है, जैसे- बचपन, किशोरावस्था, वयस्क या वृद्धावस्था। इसके लिए नियंत्रित सांस के साथ सुरक्षित, धीमें और नियंत्रित शारीरिक गतिविधियों की आवश्यकता होती है। 
बाक्स में
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा में भारत की पहल और सुझाव के बाद 21 जून, 2015 से वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा।
योग से होने वाले लाभों और फायदों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए, हरेक साल विश्व स्तर पर एक आयोजन किया जाता है, उसे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कहा जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस की 21 जून को घोषणा संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा में भारत की पहल और सुझाव के बाद की गयी। योग में प्राणायाम और कपाल-भाति योग क्रियाएं शामिल हैं, जो सबसे ज्यादा प्रभावी सांस की क्रियाएं हैं। इनका नियमित अभ्यास करने से लोगों को सांस संबंधी समस्याओं और उच्च व निम्न रक्तदाब जैसी बीमारियों में आराम मिलता है। 
योग वो इलाज है, यदि इसका प्रतिदिन नियमित रुप से अभ्यास किया जाए, तो यह बीमारियों से धीरे-धीरे झुटकारा पाने में मदद मिलती है। विशेष प्रकार के योग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं। इसलिए केवल आवश्यक और सुझाये गए योग का ही अभ्यास करना चाहिए।
यह भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने का विचार दिया था। इस प्रकार से वे पूरे भारत के साथ इस दृष्टिकोण को संपूर्ण रूप से साझा करना चाहते थे जो पूरे विश्व के लिए उत्पन्न हुई थी। 
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को पसंद किया और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी गई। यह वर्ष 2015 में पहली बार मनाया गया था। मान्यता है कि भारत में पौराणिक युग से योग की जड़े जडी हुई हैं। भारतीय परंपरा व मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने इस कला को जन्म दिया। जिनको, हम सभी आदि योगी के रूप में भी मानते है, दुनिया के सभी योग गुरुओं के लिए प्रेरणा माना जाता है। 
 ऋग्वेद में पहली बार इस अवधि का उल्लेख किया है। हालांकि योग की पहली व्यवस्थित प्रस्तुति शास्त्रीय काल में पन्तजलि द्वारा की गई है। भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने योग दिवस मनाने का विचार प्रस्तावित किया और सुझाव दिया कि यह 21 जून को मनाया जाना चाहिए। उनके द्वारा सुझाई गई इस तारीख का कारण सामान्य नहीं था। इस अवसर को मनाने के लिए यह एक ऐसी अवधि होती है जो आध्यात्मिक प्रथाओं का समर्थन करती है। इस प्रकार योग की आध्यात्मिक कला का अभ्यास करने के लिए यह अच्छी अवधि मानी जाती है। 
 योग प्राचीन समय से मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया बहुत ही महत्वपूर्ण और अनमोल उपहार है, जो जीवन भर मनुष्य को प्रकृति के साथ जोड़कर रखता है। यदि इसे नियमित रुप से किया जाए तो यह दवाईयों का दूसरा विकल्प हो सकता है। यह प्रतिदिन खाई जाने वाली भारी दवाईयों के दुष्प्रभावों को भी कम करता है। प्राणायाम और कपाल-भाति जैसे योगों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का समय है, क्योंकि यह शरीर और मन पर नियंत्रण करने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करता है।

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