राष्ट्रीय ध्वज देश की आज़ादी व संप्रभुता का होता है प्रतीक: पवन अग्रवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में राष्ट्रीय ध्वज फहराना घोषित किया मौलिक अधिकार: पवन
दिल्ली : आशीष जिंदल
आज करनाल लोकसभा क्षेत्र में विश्व हिन्दू वाहिनी के प्रदेश संगठन मंत्री पवन अग्रवाल व अन्य सदस्यों ने अंगीकरण दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। इस अमर बलिदानियो व देशभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पवन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश की आज़ादी और संप्रभुता का प्रतीक होता हैं। भारत बहुजनो का देश है। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी, अन्य जाति और जनजाति जिनको राष्ट्रीय ध्वज एक सूत्र में बांधने का काम करता है।
अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता संग्राम के लंबे संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पिंगली वेंकय्या द्वारा डिजाइन किया गया था जिसको भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई,1947 को अपनाया था। भारत का पहला ध्वज 1904-06 में स्वामी विवेकानंद की एक आयरिश शिष्य निवेदिता ने बनाया था जिसमे दो रंग लाल व पीला शामिल किये गए थे। इस ध्वज में बंगाली में ‘बोंदे मतोरम’, कमल का फूल और इंद्र देवता की वज्र शास्त्र का भी प्रयोग किया गया था।
पवन ने कहा कि 1906 में एक और ध्वज को बनाया गया था जिसको कलकत्ता ध्वज व कमल ध्वज भी कहा जाता है। इसका ध्वजारोहण 7 अगस्त 1906 में भारत की एकता और अखंडता के लिए किया गया था। दूसरा ध्वज 1907 में मैडम भीकाजी कामा, वीर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा डिजाइन किया गया था।तीसरा ध्वज 1917 में बाल गंगाधर तिलक ने एक ध्वज को बनया जिसके शीर्ष पर यूनियन जैक था। ध्वज में पांच लाल और हरे रंग के चार स्ट्रिप्स निहित थी।
उन्होंने कहा कि ध्वज 1921 में गांधीजी के आग्रह से डिज़ाइन किया गया, जिसमे शीर्ष पर तो सफेद, हरा व नीचे लाल रंग था। पाँचवा ध्वज 1931 में एक और ध्वज को डिज़ाइन किया गया था जिसमे केसरिया का प्रयोग किया गया है। छठा ध्वज 1947 में एक समिति राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में भारत के राष्ट्रीय ध्वज का चयन करने के लिए गठित की गई थी। समिति स्वतंत्र भारत के ध्वज के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को अपनाने का फैसला उपयुक्त संशोधनों के साथ- साथ 1931 के ध्वज को भारतीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। लेकिन बीच में चरखा की जगह चक्र द्वारा बदल दिया गया व इस प्रकार हमारा राष्ट्रीय ध्वज अस्तित्व में आया।
पवन अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में संविधान के अनुच्छेद 19 (i) (ए) के तहत ध्वज फहराने के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में घोषित किया था।
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