निर्जला एकादशी पर लगाई गई मीठे पानी की छबीले, फायर कर्मचारियों ने सर्विस रोड से गुजरने वाले वाहन चालकों को रोककर पिलाया मीठा पानी
देवी मंदिर के आचार्य मणिप्रसाद गोत्तम ने बताया निर्जला एकादशी का महत्व, कहा-सभी व्रतों में सबसे कठिन व्रत है निर्जला एकादशी
घरौंडा: पवन अग्रवालशहर के मुख्य चौक-चौराहों व बाजारों में निर्जला एकादशी पर मीठे पानी की छबील लगाई गई। समाजसेवियों, समाजिक संस्थाओं के साथ-साथ सरकारी महकमें भी जल सेवा के लिए आगे आए। फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने आपसी सहयोग से मीठे पानी की छबील लगाई और वाहन को रोककर सवारियों को मीठा जल पिलाया। इसी तरह मेन बाजार, रेलवे रोड, भीष्म मार्ग, मंडी मनीराम, तकिया बाजार,हनुुमान मन्दिर गली व जगह जगह शहर में छबील लगाई गई।
सोमवार को घरौंडा अग्निशमन के कर्मचारियों ने आपसी सहयोग से मीठे पानी की छबील लगाई। जिसमें फायर ऑफिसर राजीव भारद्वाज भी सेवा के लिए आगे आए। राजीव भारद्वाज ने बताया कि एकादशी के दिन मीठा पानी पिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है। आज सारा स्टाफ तपती गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने में लगा हुआ है। निर्जला एकादशी के दिन पानी पिलाने से मिलने वाले पुण्य से सभी लोग भली प्रकार से परिचित है। जिस वजह से जगह-जगह पर छबील लगाई गई है। हनुमान मंदिर गली में बिल्लू,निशु, आनन्द, मनीष,प्रदीप संजय व अन्यों ने छबील के साथ साथ भण्डारे का भी आयोजन किया।
बॉक्स-
सभी व्रतों में सबसे कठिन है निर्जला एकादशी का व्रत-
वहीं देवी मंदिर के आचार्य मणिप्रसाद गोत्तम ने सोमवार सुबह श्रद्धालुओं को निर्जला एकादशी के महत्व से परिचित करवाया। उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व है। निर्जला एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सबसे कठिन माना गया है। इस व्रत का आरंभ एकादशी की तिथि से होता है और द्वादशी की तिथि में पारण के उपरांत समाप्त होता है। एकादशी व्रत को सभी व्रतों में उत्तम बताया गया है। इस व्रत का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ मास का यह प्रमुख व्रत है। इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें