हालातों से लड़ रहे है ग्रामीण, घरों में पानी घुसा तो आंगनवाड़ी व कम्युनिटी हाल का लिया आश्रय, सुनने वाला कोई नहीं
घरौंडा: पवन अग्रवाल
मानसून की बरसात व खेतों का पानी स्टौंडी गांव की पॉवर हाउस कालोनी के लिए आफत बनकर सामने आई है। पानी की निकासी न होने के कारण खेतों का पानी कालोनी के घरों में घुस चुका है। सड़कें और गलियों को पानी ने अपनी आगोश में लिया हुआ है। आलम यह है कि घरों में कई कई फुट पानी खड़ा होने से कई परिवारों को आंगनबाड़ी व कम्युनिटी हाल में आश्रय लेने को मजबूर होना पड़ा है। कालोनी में गलियों के निर्माण पर भी ग्रामीणों ने सवालिया निशान खड़े किए है। कालोनी के प्लाटो में से मिट्टी उठाकर गली में डाले जाने से गहरे-गहरे गड्ढे बन चुके है। जिसमें कोई भी बच्चा डूब सकता है। घर से बाहर आते ही लोगों के कपड़े गीले हो जाते है। कालोनी के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। शासन व प्रशासन को भी गुहार लगाई गई लेकिन वहीं ढाक के तीन पात वाली बात हो गई। शासन व प्रशासन अपनी आंखें मूंदे बैठा है। समस्या आज से नहीं बल्कि कई सालों से है। सुनने वाला कोई नहीं है, लेकिन आज भी कालोनिवासी हालातों से लड़ रहे है।
स्टौंडी गांव की पॉवर हाउस कालोनी का लेवल काफी नीचे है। जैसे ही बरसात होती है तो खेतों में होने वाला जलभराव कालोनी की तरफ बढऩे लग जाता है। चूंकि पानी की निकासी नहीं है और कालोनी में ही पानी एकत्रित हो जाता है। घरों के साथ-साथ आंगनवाड़ी व कम्युनिटी सेंटर तक पानी से भरे हुए है। ग्रामीण जोगिंद्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र, प्रवीन, अशोक, राजेश, चंद्र, पवन, देवी दयाल व अन्य ने बताया कि विकास का ढिंढोरा पूरे देश में पिटा जा रहा है लेकिन धरातल की तस्वीर कुछ ओर ही है। बीते कई दिनों से पॉवर हाउस कालोनी में दो से तीन फुट तक पानी खड़ा हुआ है। यह पानी खेतों का है। कालोनी अवैध नहीं है बल्कि सरकारी प्लॉट कटे हुए है। जहां 30 से 40 परिवार गुजर बसर कर रहे है। कई परिवार तो ऐसे है जिनके घर ही पानी में डूब चुके है। गलियां और कालोनी पानी से लबालब है बाढ़ जैसे हालात बने हुए है। जब पानी नीचे उतरेगा तो बीमारियों का संकट कालोनी के लोगों को झेलना पड़ेगा। सुनने वाला कोई नहीं, शासन व प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है।घर में पानी घुसा तो आंगनवाड़ी में लिया आश्रय-
ग्रामीण राजेश, चंद्र, पवन व कृष्ण कुमार के घरों में पानी घुस चुका है। जहां रहना तो दूर खड़ा होना भी मुश्किल है। लिहाजा पवन व कृष्ण ने आंगनबाड़ी केंद्र में आश्रय लिया है। यहीं पर खाना बनाया जाता है और वहीं पर पशु बांधे जाते है। वहीं राजेश व चंद्र ने कम्युनिटी हालनुमा चौपाल में डेरा डाला है। घर से बेघर हुए चारों परिवार शासन और प्रशासन को कोस रहे है।
वर्जन-
स्टौंडी गांव की पॉवर हाउस कालोनी में जलभराव का मामला संज्ञान में आया है। सचिव का मौके पर भेजा गया था। मैं खुद भी मौके का मुआयना करूंगा। पानी की निकासी के लिए विकल्प तलाशा जाएगा कि किस तरह से पानी को यहां से निकाला जाए और खेतों का पानी कालोनी में ना आए। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से हल किया जाएगा।
-नरेश कुमार, बीडीपीओ मुनक।



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