बुधवार, 4 अगस्त 2021

सरकार के बेरूखेपन को देखकर पत्रकारों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा: पवन

सरकार के बेरूखेपन को देखकर पत्रकारों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा: पवन  

नई दिल्ली: आशीष जिन्दल 

आज घरौंडा में प्रैसवार्ता के दौरान विश्व हिन्दू वाहिनी के प्रदेश संगठन मंत्री पवन अग्रवाल ने पत्रकारों के समक्ष कहा कि हाल ही में हरियाणा सरकार ने पत्रकारों को दो भागों में बाँट दिया है।  एक बार फिर हरियाणा सरकार द्वारा पत्रकारों को मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता प्राप्त कह कर अपमान किया है। उन्होंने कहा कि शायद हरियाणा की भाजपा सरकार यह भूल चुकी है कि सरकार व किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई भी सम्मेलन, सभा या महासभा और रैली इत्यादि होता है तो सबसे ज्यादा न्यूज कवरेज करवाने के लिए मान्यता व गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार नहीं देखती उस समय केवल अधिकतम कवरेज  ही नजर आती है तब क्यों नहीं देखा जाता कि कवरेज करवाने के लिए केवल मान्यता प्राप्त पत्रकार ही होने चाहिए। उन्हीं को प्रैस नोट जारी करने चाहिए। 
पवन ने कहा कि भाजपा सरकार को यह भी मालूम होना चाहिए काॅविड-19 के क्रिटिकल व लाॅकडाऊन समय में गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों ने ही आम जनता को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है जब सभी अखबार बंद पड़े थे तो इन्होंने पीडीएफ फाईलों के माध्यम से जनता को जागरूक किया। उस समय मान्यता प्राप्त पत्रकार केवल सांसद, विधायक या मंत्रियों के कार्यक्रमों में अपने घरों से बाहर आते थे कभी भी  मान्यता प्राप्त पत्रकारों ने किसी भी माध्यम से जनता तक कोई सूचना नही पहुँचाई।  भाजपा सरकार को यह भी मालूम नहीं कि अधिकतर मान्यता प्राप्त पत्रकार वर्किंग में  हैं ही नहीं। फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त बने हुए हैं। कुछ तो मान्यता प्राप्त पत्रकार अपना निर्धारित क्षेत्र  छोड़कर अन्य क्षेत्रों में कार्य करते हैं। 
अग्रवाल ने कहा कि अधिकतर दैनिक समाचार पत्र अपने पत्रकारों की हरियाणा सरकार से मान्यता की प्रक्रिया ही अमल में नहीं लाते। हरियाणा सरकार दोहरी नीति अपनाकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को हिस्सों में  बाँटना चाहती है।  हरियाणा सरकार उर्फ भाजपा सरकार भूल चुकी है कि अगर गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार अपनी कलम की ताकत दिखाने पर आ गए तो सरकार के कच्चे चिट्ठे आम जनता की झोली में होंगे। हरियाणा सरकार को विकास की उम्र पता चल जायेगा कि उनके शासनकाल में विकास को कितने साल हुआ। भाजपा सरकार जानती है कि वह क्या कर रही और इसके क्या परिणाम होंगे। जब भी भाजपा सरकार कोई सुविधा पत्रकारों को देने की घोषणा करती है तो उसे दोगली नीति याद आ जाती है और पत्रकारों को हिस्सों में बाँटने का काम करती है।  
पवन ने कहा कि भाजपा सरकार हरियाणा को दोगली नीति याद आएगी भी क्यों नहीं? जिसका मुखिया चुनाव के दौरान जातीय भेदभाव भरे शब्द मंच पर प्रयोग करता है तो उससे उम्मीद ही क्या कर सकते हैं? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को हिस्सों में बाँटना भाजपा सरकार का मुख्य लक्ष्य है ताकि पत्रकार एकजुट न हो। क्या भाजपा सरकार बता सकती है कि भाजपा के पार्टी विस्तार हेतु जो कार्यकर्ता सम्मेलन किए जा रहे हैं उनमें कितने मान्यता प्राप्त पत्रकार मीडिया की भूमिका निभाते हैं। क्यों भाजपा अपने कार्यकर्ता सम्मेलन का प्रचार प्रसार अधिकतम करने के लिए ग़ैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को अधिक से अधिक अखबारों व टीवी चैनल , फेसबुक पेज लाइव, यू टयूब चैनल पर प्रसारित व पब्लिश करने के लिए प्रैस नोट व विडियो इत्यादि  भेजना जरूरी समझती है? जब ये सब गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार अच्छे से कर सकते हैं।   
अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार को यह भी मालूम होगा कि राज्य में केवल 10 प्रतिशत ही पत्रकार  मान्यता प्राप्त है ओर जो हैं उनमें अधिकतर फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त बने हुए हैं जो सरकार दी गई  द्वारा सुविधाओं का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। अगर सरकार द्वारा इनकी जाँच पड़ताल करवाई जाए तो झूठ का पर्दाफाश हो जाएगा। मान्यता प्राप्त  पत्रकारों के अधिकतर  अखबार बंद पड़े हुए  हैं  जिनके अंक पब्लिश हुए दशक बीत गए। 


 *क्या भाजपा सरकार ऐसे पत्रकारों के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में ला सकती है? 
क्यों भाजपा सरकार गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ सौतेला व्यवहार करती है? 
क्यों हरियाणा सरकार की ओर से गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सुविधाएं नहीं दी जाती?
भाजपा सरकार क्यों बाँटना चाहती है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को?
आखिर कब सुधरेगी हरियाणा की भाजपा सरकार? 
भाजपा सरकार क्यों अपना रही दोगली नीति?* 
पवन अग्रवाल ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपना दोहरी नीति का रवैैया नहीं बदला तो गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार भाजपा को उसकी औकात दिखा देंगे।  

विश्व हिन्दू वाहिनी की पत्रकारों के लिए माँगे-
1 हरियाणा सरकार गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मान्यता प्राप्त पत्रकारों के समान दर्जा दे। 
2 गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को व उनके परिवार को भी कैशलैस मैडिकल सुविधा निःशुल्क दी जाए।
3 गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को 20 लाख रुपये की बीमा सुविधा दी जाए। 
4 गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के आक्समिक निधन होने पर उनके परिवार को 50 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जाए। 
5 सरकार द्वारा मीडिया एक्रीडेशन कमेटी का पुनर्गठन किया जाए। 6 हरियाणा सरकार 'पत्रकार सुरक्षा कानून' बनाए। 
7 गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी हरियाणा सरकार 80 प्रतिशत विज्ञापन दें। 
8 मीडिया आयोग का गठन अतिशीघ्र किया जाए।
9 गैर मान्यता प्राप्त अवैतनिक पत्रकारों को प्रतिमास 25 से 30 हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जायें।
10 पेंशन योजना का सरलीकरण कर आयु सीमा 60 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष की जाए।


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